"जल का स्वभाव" ~ मनीष कुमार "असमर्थ"

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 विश्व जल दिवस की शुभकामनाएं....😊

"जल का  स्वभाव"


स्वभाव ही है बहना।
ऊर्ध्व से अधो की ओर
अवनति से उन्नति की ओर
आदि से अंत की ओर
शून्य से अनंत की ओर

स्वभाव ही है मचलना
अनियंत्रित इंद्रिय सा
भूडोल अधिकेंद्रीय सा
मनो उत्केंद्रीय सा
प्रवर्तन नवचंद्रिय सा

स्वभाव ही है सराबोर करना
जैसे गुरुभक्ति से शिष्य हो
जैसे प्रियतमा से प्रिय हो
जैसे काया से आत्मीय हो
जैसे शब्द से वर्तनी हो


स्वभाव ही है लहराना
धान के बालियों की तरह
नागिन के गतियों की तरह
रण में खड्ग चलाइयों की तरह
अस्थिर परछाइयों की तरह.....
~मनीष कुमार "असमर्थ"

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